Sunday, 20 November 2016

meri chudai meri kahanikahani in hindi choda choda kar gaad far diya

हे फ्रेंड्स आज मै फिर आ गया आपको मेरे राजा मै तुम्हारी हु स्टोरी का अंतिम भाग लेकर आपने मेरे राजा मै तुम्हारी हु-2 में पढ़ा था….यार वो गाण्ड कभी उस पर सिर रख कर लेटता कभी उस पर चुम्मि लेता कभी हाथ से सहलाता. रागिनी – यार इतनी जोरदार चुदाई के बाद भी मन नहीं भरा क्या ?… अब आगे मेरे राजा मै तुम्हारी हु -3 लेकर अब आगे…. राज – नहीं यार तुम्हारे नितंब बहुत ही सुंदर है. बिल्कुल तुम्हारे चेहरे की तरह एक दम सॉफ. नरम तो इतनी है की हाथ हटाने का मन ही नहीं होता. थोड़ी देर आराम करने दो. रागिनी – मैं तो बस यूँ ही कह रही थी. मुझे भी ये पसंद है की कोई मेरे पीछे से ये करे. आज तो मज़ा आ गया पानी मैं. यार तुमने तो मेरी खूब चुदाई की. मुझे तो आज तक किसी ने नहीं चोदा. क्या तुम पहले भी किसी को चोद चुके हो .?. राज – कइयो को चोदा है पर तुम्हारे जैसी लड़की नहीं मिली. अब मैं सिर्फ़ तुम्हें ही चोद सकता हूँ. रागिनी – ओह हाँ मैं तो भूल ही गई अब तक तुमने गोल दूध, गुलाबी निप्पल गोरी चूत और इतनी चिकनी गाण्ड नहीं देखी. (हंसते हुए) अरे यार मौसी को भी चोदना है आपको. उनका जी भी बहुत करता है. वो एकदम जवान है. जब तुम उनको चोदोगे तो तुम्हें पता चलेगा. मेरे पीरियड्स के दिनों में वो ही तुम्हारा लंड लेगी. . राज – जैसा तुम कहो जानू. पर मुझे नहीं लगता की तुम से सुन्दर कोई और होगी हिन्दुस्तान में बल्कि दुनिया में. यार थक गया हूँ. रागिनी – लो दूध पी लो मेरे राजा. और उसने बूब की निप्पल मुंह में दे दी. मैं ज़ोर ज़ोर से चाटने लगा. थोड़ी देर बाद वो खड़ी हुई और मेरा हाथ पकड़ कर कमरे क अंदर ले गई. वहाँ सारी चीज़े पड़ी थी. उसने अपने बूब पर नाभि पर अंगूर डाल दिए और मैं खाने लगा. रागिनी – यार निप्पल मत खा जाना. ध्यान से राज. मैं और वो दोनों हंस पड़े. हमने काफ़ी सारी चीज़े खाई. सारी थकान दूर हो गई. रागिनी – राज एक बार फिर चले क्या पूल में. चुदाई बाकी ना रह जाए. राज – अभी नहीं यार. चुदाई तो अब बेड पर ही करेगे. यहाँ कल आएगे. तुम खा पी कर तैयार रहना. रागिनी – यार मैं तो उंगली ले ले कर थक चुकी थी. आज से तुम्हारा लंड ही काम में लूँगी. जो मज़ा तुमने दिया वो कभी नहीं मिला. वो बहुत ही खुश थी. उसकी आँख में चमक आने लगी. पर यार कल सुबह से लेकर 1 बजे तक तो मैं ऑफीस में जाउंगी. जो करना है आज रात कर लेना या दोपहर के बाद. राज – मुझे भी कल कॉलेज जाना है. मेरा कॉलेज यहाँ से किस तरफ है .?. मुझे 7:30 तक कॉलेज जाना है. रागिनी – यार, मैं तुम्हें गाड़ी में बिठा कर वहाँ छोड़ने जाउंगी. और जाते समय पप्पी भी दूँगी मेरे राज. . राज – पप्पी से काम नहीं चलेगा. बूब भी चूसने पड़ सकते हैं. फिर वो हँसने लगी. रागिनी – मेरे बूब तुम्हें इतने अच्छे लगते हैं .?. तो ये लो चूस लो. . उसने मेरे मुंह में अपना निप्पल दे दिया. मैं चूस रहा था. वो बातें करती जा रही थी. रागिनी – चलो यार. .चलें. वहीं नहाएगे.आप ये कहानी गुरुमास्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है . राज – लेकिन कपड़े .?. .?. रागिनी – यार आते समय किसी ने हमें देखा था क्या .?. जो अब देखेगा. यहाँ कोई नहीं है. .चलो. . हम चल पड़े. हम दोनों ने अपने फोन लिए. राज – यार, हमारे कपड़े तो ले लें. रागिनी – रहने दो नौकरानी ले आएगी. हम नंगे ही चल पड़े. मुझे अजीब सा लग रहा था. वो मेरे आगे चल रही थी और मैं शरमाता हुआ पीछे. हाँ लेकिन चलते समय, मैंने नंगी गाण्ड पहली बार देखी थी. उफ्फ क्या दिखती है नंगी गाण्ड लड़की के चलते समय और जब वो खरबूजे जैसी गोल हो तो लंड ही फट जाए. रागिनी – यार तुम अब भी शर्मा रहे हो. मेरी इतनी चुदाई करने के बाद भी !! उसने मेरे हाथ पकड़ा और चल पड़ी. हम 20 मिनिट बाद कमरे में थे. फिर हम दोनों एक साथ नहाए. उस रात तो सेक्स नहीं किया लेकिन रात को हम नंगे सोए.आप ये कहानी गुरुमास्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है . सेक्स तो नहीं किया पर सोते समय मैने उसके बूब चूसे. रात को नींद खुली तो देखा वो चुपचाप सो रही है. मैंने उसकी चूत में लौड़ा डाला और धीरे – धीरे धक्के मारे. सुबह वो उठ चुकी थी. उसने चाय दी. वो मेरे पास बैठी थी. मैने उसकी पप्पी ली और चाय पी. नाह कर मैं कॉलेज जाने वाला था. हम कॉलेज क पास पहुँच गये. कॉलेज खुलने में 40 मिनिट पड़े थे. उसने पप्पी दी और जाने को कहा. राज – यार, पप्पी से काम नहीं चलेगा. वो समझ गई. उसने जल्दी से नाइटी खोली. बूब मेरे सामने कर दिए. राज – तुमने ब्रा नहीं पहनी .?. .?. रागिनी – मुझे पता था, तुम बूब ज़रूर चुसोगे. अरे आज मैं शाम को तुमको एक गिफ्ट देने वाली हूँ. राज – यार, शाम को देखते हैं. टाइम तो काफ़ी पड़ा है. सिरवहाँ मेरा फ्रेंड बोला की तुम रूम में तो नहीं थे .?. राज – यार मुझे घर पर ज़रूरी काम है. मैं सामान लेकर गाँव आ गया. तेरे साथ कोई और फ्रेंड अड्जस्ट कर दूँगा. मुझे तो अब रोज़ अप डाउन करना पड़ेगा. वो मान गया. वहाँ मेरा मन नहीं लगा. दोपहर को छुट्टी होते ही मैं वापस घर पहुँच गया. मैंने देखा वहाँ उस साइड कोई नहीं जाता. वो हरी साड़ी में कयामत लग रही थी. राज – यार कॉलेज में बिल्कुल भी मन नहीं लगा. आप ये कहानी गुरुमास्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है . सारे दिन बस तुम ही नज़र के सामने घूम रही थी. वो हँसी. रागिनी – मेरा भी यही हाल था. हम खाना खाने के बाद लेट गये. शाम को 6 बजे जागे. फिर घूमने निकल पड़े. खूब बातें हुई. फिर खाना खाया और बेड रूम में आ गये. रागिनी ने एक बॉक्स दिया. मैंने खोला तो उसमें नोकिया का नया फोन था. रागिनी – ये है तुम्हारा गिफ्ट. एक और गिफ्ट है. उसके लिए हमें चौथी मंज़िल पर जाना पड़ेगा. राज – यार तुम तो कमाल करती हो. इतना महेंगा मोबाइल मेरे लिए !!! रागिनी – प्यार मैं सब चलता है. तुम ने तो मेरा जीवन खुशी से भर दिया है. उसकी कीमत तो मैं अदा नहीं कर सकती. वो एमोशनल हो गई. मैंने उसके चहरे को चूम लिया. मुझे उस पर प्यार आ रहा था. फिर हम ऊपर जाने लगे. ऊपर गया तो देखा की च्चत पर एक बेड लगा हुआ था. उस पर गुलाब क फूल बिछे थे. बड़ी खुश्बू आ रही थी. मानो सुहाग रात की सेज हो. चाँदनी रात मज़ा लूटा रही थी. आज तो ठंड भी अपना जादू चला रही थी. हम दोनों बहुत खुश थे. रागिनी – आज मैं आपकी रानी और तुम मेरे राजा. वो मुझे बोली की तुम रूको, मैं आधे घंटे मैं आती हूँ. मैं वहाँ आराम करने लगा. 40 मिनिट बाद वो लाल जोड़े में दुल्हन की तरह सज कर आई. उसके कपड़ो में सेंट की भीनी खुश्बू आ रही थी. वो वहाँ बैठ गई. मैंने घूघाट उठाया तो एक क़यामत ढा रही थी. मैंने उसको किस कर दिया. वो शरमाने लगी. मैंने रागिनी को बेड पर लेता लिया. धीरे – धीरे उसको किस करने लगा. वो सिसकारियाँ भरने लगी. रागिनी – शादी से पहले मेरी सुहाग रात को लेकर बहुत चाह थी. सहेलियों ने जाने क्या क्या बातें बताई थी. डर तो था पर रोमांच ज़्यादा था. लेकिन मेरे पति ने सिर्फ़ मम्मे चूसे और जब चोदना चाहा तो लंड में इतना कड़ापन ही नहीं आया की चूत चोद सके.आप ये कहानी गुरुमास्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है . दो चार दिन कोशिश के बाद तो उन्होने मम्मे चूसना भी छोड़ दिया. राज – भूल जाओ वो सब. सोचो आज ही तुम्हारी सेज सजी है. मैं अब उसके गाल चूस कर बूब चाटना चाहता था. फिर उसकी वो ड्रेस खोल दी. वो अब लाल रंग की ब्रा और लाल रंग की एक जालीदार पैंटी में थी. मैंने उसकी पीठ पर हाथ फेरना शुरू कर दिया. वो मचलने लगी. फिर मैने उसकी पैंटी में हाथ डाल दिया. वो आ आ करने लगी. अब मैं भी नंगा हो गया था. उसकी ब्रा और पैंटी खोल दी. चाँदनी रात में उसका गोरा लाल ज़िस्म संगमरर की तरह चमकने लगा. मैंने उसके माथे पर किस किया. फिर होंठ की पप्पी ली. अब उसके बूब की बारी थी. फिर उसको उल्टा कर पीठ को चाटना शुरू कर दिया. वो अया आ करने लगी. अबकी बार मैने उसके गोरे और मुलायम नितंब को चूसना शुरू किया. ना जाने उस अप्सरा की गाण्ड से मैं कितनी देर खेलता रहता लेकिन उसने पलट कर मेरा लौड़ा पकड़ लिया. फ़िर हम 69 पोज़िशन में आ गये. वो मेरा लंड चूस रही थी और मैं उसकी गुलाबी चूत. आज उसकी चूत एकदम सॉफ थी. मखमल की तरह चिकनी.आप ये कहानी गुरुमास्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है . उसकी गाण्ड, दूध, निप्पल के बाद अब मैं आज उसकी चूत का भी दीवाना हो गया. फिर मैंने उसके बूब को चाटने लगा. उसके बाद उसकी निप्पल मेरे मुंह में आ गई. गुलाबी निप्पल को चूसने का मज़ा ही कुछ और था. मैं बदल बदल कर दोनों निप्पल को चूस रहा था. रागिनी – आज से तुम मेरे पति हो. मेरा सब तुम्हारा है. ये सुहाग रात यादगार बना दो. राज – हाँ मेरी रानी तुम सदा क लिए मेरी हो गई हो. चाँदनी रात अपने श्वाब पर थी. ठंड भी बढ़ने लगी. ठंड में सेक्स का मज़ा दुगना हो रहा था. अब मैं उसके ऊपर लेट गया. उसकी चूत में मेरा लंड समा चुका था. उसके बूब मेरे सीने से लग रहे थे. उसकी कड़क निप्पल का टच बहुत ही शानदार था. उसके होंठों को मैं चूस रहा था. मेरा सारा वेट उसके शरीर पर था. उसकी बाहें पीछे की तरफ थी. मेरी बाहें भी उसके ऊपर थी. उसकी हथेली पर मेरी हथेली थी. फिर उसने अपने हाथ क पंजे को भींचना शुरू कर दिया. आज का सेक्स अलग तरह का था. उसके होंठों में बहुत रस आ रहा था. मैं लगातार चूस रहा था. उसने अपने हाथ नीचे कर लिए. मैं अब उसे ज़ोर से चोद रहा था. वो काफ़ी खुश थी. मेरे लंड में सुन्न आ गई थी. मज़ा ही मज़ा था. रागिनी – डॉगी स्टाइल में चोदो ना. . चूत के अंदर तक लंड जाता है. आह आ आ. मैंने उसे डॉगी स्टाइल में लेकर पीछे से लंड चूत में डाल दवहाँ मेरा फ्रेंड बोला की तुम रूम में तो नहीं थे .?. राज – यार मुझे घर पर ज़रूरी काम है. मैं सामान लेकर गाँव आ गया. तेरे साथ कोई और फ्रेंड अड्जस्ट कर दूँगा. मुझे तो अब रोज़ अप डाउन करना पड़ेगा. वो मान गया. वहाँ मेरा मन नहीं लगा. दोपहर को छुट्टी होते ही मैं वापस घर पहुँच गया. मैंने देखा वहाँ उस साइड कोई नहीं जाता. वो हरी साड़ी में कयामत लग रही थी. राज – यार कॉलेज में बिल्कुल भी मन नहीं लगा. आप ये कहानी गुरुमास्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है . सारे दिन बस तुम ही नज़र के सामने घूम रही थी. वो हँसी. रागिनी – मेरा भी यही हाल था. हम खाना खाने के बाद लेट गये. शाम को 6 बजे जागे. फिर घूमने निकल पड़े. खूब बातें हुई. फिर खाना खाया और बेड रूम में आ गये. रागिनी ने एक बॉक्स दिया. मैंने खोला तो उसमें नोकिया का नया फोन था. रागिनी – ये है तुम्हारा गिफ्ट. एक और गिफ्ट है. उसके लिए हमें चौथी मंज़िल पर जाना पड़ेगा. राज – यार तुम तो कमाल करती हो. इतना महेंगा मोबाइल मेरे लिए !!! रागिनी – प्यार मैं सब चलता है. तुम ने तो मेरा जीवन खुशी से भर दिया है. उसकी कीमत तो मैं अदा नहीं कर सकती. वो एमोशनल हो गई. मैंने उसके चहरे को चूम लिया. मुझे उस पर प्यार आ रहा था. फिर हम ऊपर जाने लगे. ऊपर गया तो देखा की च्चत पर एक बेड लगा हुआ था. उस पर गुलाब क फूल बिछे थे. बड़ी खुश्बू आ रही थी. मानो सुहाग रात की सेज हो. चाँदनी रात मज़ा लूटा रही थी. आज तो ठंड भी अपना जादू चला रही थी. हम दोनों बहुत खुश थे. रागिनी – आज मैं आपकी रानी और तुम मेरे राजा. वो मुझे बोली की तुम रूको, मैं आधे घंटे मैं आती हूँ. मैं वहाँ आराम करने लगा. 40 मिनिट बाद वो लाल जोड़े में दुल्हन की तरह सज कर आई. उसके कपड़ो में सेंट की भीनी खुश्बू आ रही थी. वो वहाँ बैठ गई. मैंने घूघाट उठाया तो एक क़यामत ढा रही थी. मैंने उसको किस कर दिया. वो शरमाने लगी. मैंने रागिनी को बेड पर लेता लिया. धीरे – धीरे उसको किस करने लगा. वो सिसकारियाँ भरने लगी. रागिनी – शादी से पहले मेरी सुहाग रात को लेकर बहुत चाह थी. सहेलियों ने जाने क्या क्या बातें बताई थी. डर तो था पर रोमांच ज़्यादा था. लेकिन मेरे पति ने सिर्फ़ मम्मे चूसे और जब चोदना चाहा तो लंड में इतना कड़ापन ही नहीं आया की चूत चोद सके.आप ये कहानी गुरुमास्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है . दो चार दिन कोशिश के बाद तो उन्होने मम्मे चूसना भी छोड़ दिया. राज – भूल जाओ वो सब. सोचो आज ही तुम्हारी सेज सजी है. मैं अब उसके गाल चूस कर बूब चाटना चाहता था. फिर उसकी वो ड्रेस खोल दी. वो अब लाल रंग की ब्रा और लाल रंग की एक जालीदार पैंटी में थी. मैंने उसकी पीठ पर हाथ फेरना शुरू कर दिया. वो मचलने लगी. फिर मैने उसकी पैंटी में हाथ डाल दिया. वो आ आ करने लगी. अब मैं भी नंगा हो गया था. उसकी ब्रा और पैंटी खोल दी. चाँदनी रात में उसका गोरा लाल ज़िस्म संगमरर की तरह चमकने लगा. मैंने उसके माथे पर किस किया. फिर होंठ की पप्पी ली. अब उसके बूब की बारी थी. फिर उसको उल्टा कर पीठ को चाटना शुरू कर दिया. वो अया आ करने लगी. अबकी बार मैने उसके गोरे और मुलायम नितंब को चूसना शुरू किया. ना जाने उस अप्सरा की गाण्ड से मैं कितनी देर खेलता रहता लेकिन उसने पलट कर मेरा लौड़ा पकड़ लिया. फ़िर हम 69 पोज़िशन में आ गये. वो मेरा लंड चूस रही थी और मैं उसकी गुलाबी चूत. आज उसकी चूत एकदम सॉफ थी. मखमल की तरह चिकनी.आप ये कहानी गुरुमास्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है . उसकी गाण्ड, दूध, निप्पल के बाद अब मैं आज उसकी चूत का भी दीवाना हो गया. फिर मैंने उसके बूब को चाटने लगा. उसके बाद उसकी निप्पल मेरे मुंह में आ गई. गुलाबी निप्पल को चूसने का मज़ा ही कुछ और था. मैं बदल बदल कर दोनों निप्पल को चूस रहा था. रागिनी – आज से तुम मेरे पति हो. मेरा सब तुम्हारा है. ये सुहाग रात यादगार बना दो. राज – हाँ मेरी रानी तुम सदा क लिए मेरी हो गई हो. चाँदनी रात अपने श्वाब पर थी. ठंड भी बढ़ने लगी. ठंड में सेक्स का मज़ा दुगना हो रहा था. अब मैं उसके ऊपर लेट गया. उसकी चूत में मेरा लंड समा चुका था. उसके बूब मेरे सीने से लग रहे थे. उसकी कड़क निप्पल का टच बहुत ही शानदार था. उसके होंठों को मैं चूस रहा था. मेरा सारा वेट उसके शरीर पर था. उसकी बाहें पीछे की तरफ थी. मेरी बाहें भी उसके ऊपर थी. उसकी हथेली पर मेरी हथेली थी. फिर उसने अपने हाथ क पंजे को भींचना शुरू कर दिया. आज का सेक्स अलग तरह का था. उसके होंठों में बहुत रस आ रहा था. मैं लगातार चूस रहा था. उसने अपने हाथ नीचे कर लिए. मैं अब उसे ज़ोर से चोद रहा था. वो काफ़ी खुश थी. मेरे लंड में सुन्न आ गई थी. मज़ा ही मज़ा था. रागिनी – डॉगी स्टाइल में चोदो ना. . चूत के अंदर तक लंड जाता है. आह आ आ. मैंने उसे डॉगी स्टाइल में लेकर पीछे से लंड चूत में डाल द नौकरानी ने हामी भरी और मेरी तरफ देख कर मुस्करा कर चली गई. हम खाना खाने कमरे में आ गये. राज – यार, वो नौकरानी मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा कर क्यों गई थी .?. तुम ने निहारिक को क्यों बुलाया .?. रागिनी – यार, तुम भी ना. .वो तुम्हें मेरी जैसी अपनी सील बंद चूत गिफ्ट करेगी. . राज – रहने दो ना यार. .ये सब ठीक नहीं है. . रागिनी – सब ठीक है. . वैसे भी वो भी किसी ना किसी दूसरी जगह मरवा लेगी. . जो अच्छे पैसे दे देगे. ये लोग हमेशा ऐसा ही करती हैं. . मां बेटी जैसा कोई हिसाब किताब नहीं होता. इसकी मां तो मौसा जी से सारी रात मरवाती थी. . सारी नौकरानी तो 1000 2000 के लिए मेरे हज़्बेंड के दोस्तों से भी चुदवाती है. . और निहारिक तो बॉम्ब है. . तुम एक बार देखना. . मज़ा आ जाएगा. डरने जैसी कोई बात नहीं. इन लोगों का कोई ईमान धरम नहीं होता. इनका मज़हब सिर्फ़ पैसा होता है. हाँ निहारिक के लिए कीमत ज़रा ज़्यादा अदा करनी पड़ेगी. बस. राज – जैसी तुम्हारी मर्ज़ी. . हम खाना खा चुके थे. खाना खा कर मैं सोने चला गया. रागिनी मेरे साथ सो गई. मैं बातों बातों में उसके बूब दबा रहा था. फिर थोड़ी देर बाद, बाहर कमरे से आवाज़ आई – मैडम जी. रागिनी बाहर गई. बाहर शायद कोई आया था. रागिनी – तुम आ गई. . तुम्हें पता है ना. .साहब को खुश करना है. . बहुत पैसा दुगी मैं. .आप ये कहानी गुरुमास्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है . निहारिक – जी मैडम. . साब को मज़ा आ जाएगा. लेकिन वो मैडम कितना मिलेगा. रागिनी – तुम बोलो. निहारिक – 10,000 चलेगा मैडम. वो क्या है ना अभी तक मेरी खुली नहीं. रागिनी – ठीक है दिए. तो कमरे में पानी लेकर जाओ. . झुक कर पानी देना साहब को. . समझ गई ना. . निहारिक ने हामी भरी और पानी लेकर अंदर चली गई. . निहारिक ने झुक कर पानी दिया. . पानी देते समय उसके गोल बूब दिख रहे थे. राज – क्या नाम है तुम्हारा. . रागिनी कहाँ है .?. निहारिक – मैडम जी तो नीचे चली गई. . मेरा नाम निहारिक है. . मैडम जी ने आपके पास भेजा है. . वो थोड़ी मुस्कुराइ. . उसने गिलास उठाया और मूड कर ग्लास रखने लगी तो उसकी गोल गोल गाण्ड दिख गई. वो तो मस्त माल थी. राज – आओ मेरे पास. वो मेरे पास आई तो मैंने बिना देर किए उसको अपनी तरफ खीच लिया और कमीज़ के ऊपर से ही उसके बूब पकड़ लिए. निहारिक – साहब आराम से. . कचनार की कली हूँ अभी. वो मुस्कराने लगी. . उसके बूब तो सलवार में जंप खा रहे थे. रीडर्स को बता दूं वो शिमला की नौकरानी की लड़की थी इसलिए उसका चित्रण अपने दिमाग़ में काली गंदी सी बाई जैसा ना बनाए. हिमालय की गोद मे बैठने वाली किसी भी वर्ग की लड़की को खूबसूरती वरदान में मिलती है. उसके बूब एक दम तीखे थे. मैंने उसके कपड़े उतार दिए. इधर वो मेरे कपड़े उतार चुकी थी. फिर मेरा लंड देख कर वो थोड़ी चिहुँक गई.आप ये कहानी गुरुमास्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है . सॉफ लग रहा था उसने पहली बार लंड देखा था. उसकी उम्र मुश्किल से 15 या 16 साल थी. मैंने उसको पीछे से पकड़ा और उसके बूब दबाने लगा. फिर मेरा लंड उसकी गाण्ड में लग गया. वो सिसकारियाँ भरने लगी. मैं उसके बूब को दबा रहा था. उसके बूब सुंदर थे पर रागिनी जैसे नहीं. वो भी पहाड़ी थी पर निप्पल हल्के गुलाबी की जगह डार्क गुलाबी थे. उतने छोटे भी नहीं थे. रागिनी के निप्पल अगर अनार के दाने थे तो उसके अंगूर के. दूध गोल ज़रूर थे पर रागिनी जैसी गोलाई दूर दूर तक नहीं थी. हाँ रंग गोरा होने के साथ साथ लाल ज़रूर था. खैर, वो लड़की थी और उसके पास चूत थी. सबसे बड़ी बात सील बंद. तो दोस्तों कैसी लगी मेरी सच्ची स्टोरी मजा आया तो कमेंट करना ना भूले |

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